Zindagi Ka Safar

सितारों से आफताब तक का सफ़र
तनहा था
मगर
टूटकर बिखरा जो नूर
वो भी तो तेरा था|

आंखे ऊपर कर और
देख ये समां
तेरी ही महफ़िल में
खोई है हस्ती तेरी|

ज़मीन से यूं फलक को तकता है
मंज़िल तेरी और तारों से रस्ता पूछता है?

वक्त से आगे निकलने की चाह में
सब कुछ पीछे छूट गया|
मंज़िल मिली तो मुड़कर देखा
सफ़र अधूरा छूट गया||

आप किसी भी हालत में हो
अगर ज़िंदगी आपके साथ है
तो आप अपने हालात बदल सकते हैं|

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